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बस यूँही….

By abchandorkar

Consultant Interventional Cardiologist, Pune, India

14 replies on “बस यूँही….”

Beautiful photograph…..👌👌

रात की बरसती चांदी ,
औंर सहर का पिघलता सोना…..
आंखोंसे गिरती नमी का….
उनपर मोती पिरोंना….
सुख दुख के इन् गहनोसे….
खुद को सजाते जाना….
हर एक खिलती जिंदगी का….
बस यही है फसाना…..

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Excellent Kshamajee,
Please allow me to add some more….

रात के अंधेरेने सजाए कई सुनहरे सपने,
सहर होते ही दौड़ पड़े करने साकार वो सपने,
आंखों में सजाई नमी, परोने मोती जो हुए सच सपने,
कभी खुशी कभी गम, बस सजाए रोज नए सपने,
फसाने कई हजार जिंदगी के, बातों में समाए हर सपने….

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हर अंधेरा ले आया एक सुनहरे सहर की आश,
हर तन्हाई ले आती है एक मधुर मिलन की आश,
गर सहर हो भी जाए, बिन मिले तुझे मेरा तो जीवन अंधेरी रात…

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